शीतली और शीतकारी जैसे शीतलता से जुड़े प्राणायाम पारंपरिक योग में उपयोग किए जाते हैं। शांत, सहज श्वास और ध्यान कुछ लोगों को तनाव सँभालने में मदद कर सकते हैं, लेकिन इनसे हाई BP का इलाज होने या कुछ ही मिनटों में रक्तचाप नियंत्रित होने की गारंटी नहीं है।
पहले सुरक्षा समझें
यदि आपको हाई BP है, तो नियमित चिकित्सकीय जाँच और निर्धारित दवा जारी रखें। सांस रोकने, जोर लगाने या बहुत तेज श्वास वाले अभ्यास से बचें, जब तक आपके चिकित्सक और योग्य योग शिक्षक विशेष रूप से अनुमति न दें।
शीतली और शीतकारी का परिचय
शीतली में आम तौर पर जीभ को नली जैसा मोड़कर धीरे सांस भीतर लेने का अभ्यास बताया जाता है; शीतकारी में दाँतों के बीच से हवा भीतर ली जाती है। हर व्यक्ति की जीभ या मुँह की बनावट अलग होती है—असुविधा हो तो अभ्यास न करें।
शुरुआती अभ्यास
आराम से बैठें, कंधे ढीले रखें और बिना जोर लगाए कुछ सामान्य सांसें लें। यदि सहज लगे तो 3–5 बार धीमी, आरामदायक श्वास लें और सामान्य श्वास पर लौटें। चक्कर, बेचैनी या सांस की तकलीफ हो तो तुरंत रोक दें।
कब मदद लें
सीने में दर्द, गंभीर सांस की कमी, बेहोशी, कमजोरी या अचानक बहुत तेज सिरदर्द होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें। प्राणायाम को दवा का विकल्प न मानें।
लेखक: Mukesh, Ashtangaa Yoga with Mukesh. योगाभ्यास अपनी क्षमता और योग्य मार्गदर्शन के अनुसार करें।
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